बंजारन शांतम्मा की डर और खौफ की कहानी |
(नमस्कार मैं आपका दोस्त अनिल कुमार नानवारे) डर की और खौफ एक बंजारन शांतम्मा की कहानी |आपके साथ साझा करूंगा | यह कहानी तेलंगाना के शहर हैदराबाद की है| कहा जाता है |
कि शांतम्मा अपने खेत में उगे हुए अमरूद, मक्का, अंगूर, और कई प्रकार के फल फूल भेजा करती थी | शांतम्मा का पति दिन भर अपने खेत में फल फूल सब्जी हो गया करता था| और शांतम्मा घर के काम निपटने के बाद अपने खेत में हुए हुए फल सब्जी इत्यादि रेलगाड़ी से बेचने के लिए हैदराबाद आया जाया करती थी | शांतम्मा बहुत आकर्षित दिखने में सावला रंग सुशील समझदार थी |
जिस ट्रेन से शांता माया जाया करती थी उस ट्रेन में जो भी एक नजर शांतम्मा को देख लेता वह उसका दीवाना हो जाता | लोगों को शांतम्मा की आने की खबर उसके पायल से पता चल जाता था | पैरों में पायल की छम छम छम की आवाज दूर से सुनाई देती थी| इससे लोगों को पता चल जाता था कि सैंतामा आ रही है| शांतम्मा लोगों की नजर को भली-भांति समझती थी और काफी समझदारी के साथ फल फूल सब्जी बेचा करती थी | शांतम्मा को लोग आंखें फाड़ फाड़ कर देखा करते थे| हैदराबाद में निजाम का राज चलता था| हैदराबाद में कई बड़े-बड़े हवेलियों और कोठियों में फूल, फल, सब्जी भेजा करती थी|
शांतम्मा अपने पति और एक बच्चे के साथ खुश थी | उस समय अंग्रेजों का आखरी दौर चल रहा था कुछ अंग्रेजजो सिपाहियों शांतम्माा को पहने की चाहत रखते थे कई बार उसे कई प्रकार की लालच देने की कोशिश किया करते थे| मगर शांतम्माा समझदार थी अपनी सूझबूझ से हर परिस्थितियों सामना करती थी| 1 दिन की बात बात है जब सारे फल सब्जी बेचकर कर अपने घर के लिए लौटने लगी, रेलवे स्टेशन में पता चला कि सुबह तक कोई रेल नहीं चलेगी. क्योंकि कहीं आगे ट्रेेेेेन पटरी से नीचे उतर गई इसीलिए सभी ट्रेनों को रद्द कियााा जा चुका था| कहा जाता है कि अपने घर जानेेेे के लिए शांतम्मा काफी परेशान थी| कुछ लोगों ने देख कर रात में उनके यहां विश्राााम कर के सुबह जानेेेेे के ने कहा, शांतम्मा और उसके बच्चे के खाने-पीने के लिए बंदोबस्त किया| अब मजबूरीी थी जानेेेेेेेेेेेेेेे के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं थेपलब्ध नहीं थेलब्ध नहीं थे| उस रात अमावस्याा थी| उन लोगों ने शांतम्मा के साथ कुछ गलत किया और उसे मार कर उसके बच्चेेेेे के साथ दफना दिया| उस दिन से आज तक उसकी आत्मा भटक रही है| जो अंग्रेेेेज सिपाही थे वह अपने आप को फांसी लगाकर आत्महत्याााा कर लिया| आज भी शांतम्मा की आत्मा उन लोगों को तलाश रही है| हर अमावस्या को शांतम्मा उस रेलवे स्टेेेशन से निकलकर जिस गली में मोहल्लेे मैं जाती थी| आज भी हर अमावस्या की रात छम छम छम छम करते हुए निकलती है| कहां जाताा है हर अमावस्याााा को जादू टोनेेेे टोटके करते| भूत पिक्चर का समय रात में 12:00 बजे से सुबह के 3:00 बजे तक रहता है| दो दोस्त खूब शराब पिए हुए रात 12:00 बजे की आखिरी बस से लौट रहे थे| तब उन दोनों को कुछ दूर पैदल चलने के बाद कानों में दूर से आती हुई छम छम छम छम और बच्चे रोने की आवाज कीने मैं सुनाई देनेेेे लगी दोनों ने देखा की उस औरत के सर पर एक टोकरी और गोद में छोटाााा सा बच्चा रोतेेेे हुए पैदल ले जा रही थी| यह दोनों यह सोच रहे थे कि इतनी रात में यह क्यााा बेच रही है| इन दोनों के जेहन में आया कि देखते हैं कौन इस रात में रास्ते पर पैदल जा रही है| करीब- करीब रात के 1:00 बज रहेेे थे| उन दोनों में से एक्ने आवाज लगाई सुनोो इतनी रात में कहां जा रही हो उस औरत ने पीछेेेेेेेे पलट कर नहीं देखा तभी एक ने दौड़ कर उसे आगे से रोकना चाहा मगर उन्हें क्या पता था कि वह तो शांतम्मा का भूत है| जो आज भी उन लोगों की तलाश में हर अमावस्या की रात को उसी रास्तेेेेेे पर निकलती है| उन दोनों में से एक आगे जाकर रोकना चाहााा रास्ता तभी वह जोर से चिल्लाते हुए कहां भूत,,,, भागो |
देखते ही देखते बड़ी-बड़ी आंखें से देख कर मुंह खुलाााा हुआ जमीन पर धड़ाम,,, से बेहोश हो कर गिर पड़ा | जैसे ही भूत,,, भूत,,, की आवाज सुनकर पलट कर भागने लगा तभी ऐसा लगा कि किसी ने पीठ पर जोर से मुक्का मारा और तभी वह भी खून की उल्टी कर जमीन पर गिर पड़ा | शांतम्मा के भूत को आज भी उन लोगों की खून की प्यासी है| मानो ऐसा लगता है कि सरसराती हुई ठंडी हवा भी हमें छूकर गुजराती है और हमारे रोंगटे खड़े हो जाए तो लगता है शांतम्मा यही आस पास है| अगर कोई मक्खी हमारे माथे पर हाथ और चेहरे पर भिन्न-भिन्न है तो लगता है तो ऐसा महसूस होता है कि शांतम्मा अपने उंगली से शहला रही है | शहला-शहला के मदहोश कर अपनी लंबे नाखून से मार सकती है | अगर ऐसा आपको लगेगा तो डरना नहीं पीछे मुड़कर मत देखना क्या पता नहीं शांतम्मा को आपके बारे में गलतफहमी हो जाए| अकेले में शांतम्मा की यह कहानी पढ़ते समय आप को डर और खौफ लगने लगेगा यदि आपके रोंगटे खड़े हो जाए और किसी के होने का एहसास तो समझ लेना शांतम्मा,,,, तो नहीं|
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